रेस्टोरेंट स्टाफ शेड्यूलिंग: शिफ्ट को कैसे बेहतर बनाएं और लेबर कॉस्ट कम करें
भारत में किसी भी रेस्टोरेंट की कमाई का 30-35% हिस्सा लेबर कॉस्ट में चला जाता है। गलत शेड्यूलिंग का मतलब है कि या तो आपके पास फालतू समय में ज्यादा स्टाफ है या फिर भीड़ के वक्त कम—दोनों ही हालत में आपका मुनाफा घटता है। हल यह नहीं है कि टीम से ज्यादा मेहनत करवाएं; हल है स्मार्ट तरीके से शेड्यूल करना।
अपने पीक ऑवर्स को ट्रैक करें
पिछले 2-3 महीनों के सेल्स डेटा को देखें। ज्यादातर भारतीय रेस्टोरेंट में लंच की भीड़ दोपहर 1-3 बजे के बीच होती है और डिनर की रश 8-10 बजे के बीच। इन टाइम स्लॉट में अपने अनुभवी स्टाफ को शेड्यूल करें और शाम 4-7 बजे के बीच, जब फुटफॉल कम होता है, तब स्टाफ की संख्या घटा दें।
लेबर कॉस्ट कम करने के तुरंत काम आने वाले तरीके
- •वेटर्स के लिए स्प्लिट शिफ्ट रखें—उन्हें लंच और डिनर में काम पर रखें, बीच में ब्रेक दें
- •किचन स्टाफ को क्रॉस-ट्रेन करें ताकि वे सुस्त घंटों में काउंटर संभाल सकें
- •प्रिंटेड मेन्यू की जगह DineCard (dinecard.in) जैसे QR कोड का इस्तेमाल करें सिर्फ ₹99/month में—इससे सर्वर का डिश समझाने का समय बचता है
- •हर हफ्ते लेबर कॉस्ट परसेंटेज ट्रैक करें—कोशिश करें कि यह आपकी कमाई के 32% से नीचे रहे
आखिरी वक्त में शिफ्ट बदलने के लिए एक WhatsApp ग्रुप बनाएं। इससे स्टाफ खुश रहता है और आपको बिना एक्स्ट्रा लोग रखे कवरेज मिल जाती है।
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